सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि या कीट-रोग — एक ही झटके में किसान की पूरी फ़सल नष्ट हो सकती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) मात्र 1.5%–2% प्रीमियम पर फ़सल को बीमा सुरक्षा देती है, ताकि नुक़सान होने पर किसान को मुआवज़ा मिले और वह अगले सीज़न फिर खड़ा हो सके। इस post में प्रीमियम दरें, पात्रता, आवेदन और दावा (claim) की पूरी प्रक्रिया जानिए।
📌 प्रमुख बिंदु
- किसान का प्रीमियम मात्र — खरीफ 2%, रबी 1.5%, वाणिज्यिक/बागवानी फ़सल 5% (बीमित राशि का)
- शेष भारी प्रीमियम केंद्र व राज्य सरकारें देती हैं (सामान्य राज्यों में 50:50; पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों में 90:10)
- कवर बुवाई से कटाई के बाद तक — बुवाई न हो पाना, खड़ी फ़सल का नुक़सान, स्थानीय आपदाएँ और कटाई-पश्चात हानि शामिल
- खरीफ 2026 से नया: जंगली पशुओं के हमले से फ़सल हानि भी स्थानीय जोखिम में ऐड-ऑन कवर के रूप में शामिल; धान के खेतों में जलभराव का कवर भी पुनः शुरू
- स्थानीय आपदा की सूचना 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है — वरना दावा खारिज हो सकता है
- 2020 से योजना सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक है — ऋणी व गैर-ऋणी, दोनों किसान नामांकन करा सकते हैं
- दावा भुगतान में देरी होने पर बीमा कंपनी को किसान को 12% वार्षिक दंड ब्याज देना होता है
योजना का परिचय
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana – PMFBY) 18 फरवरी 2016 को शुरू हुई और इसने पुरानी NAIS व MNAIS योजनाओं की जगह ली। यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की प्रमुख फ़सल बीमा योजना है, जो राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित फ़सलों और क्षेत्रों में लागू होती है। बीमित राशि (Sum Insured) उस फ़सल के वित्त पैमाने (Scale of Finance) के बराबर रखी जाती है, ताकि किसान को अधिकतम जोखिम सुरक्षा कम से कम प्रीमियम पर मिले। खरीफ 2026 में यह योजना 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। नुक़सान का आकलन फसल कटाई प्रयोगों (Crop Cutting Experiments), सैटेलाइट/रिमोट सेंसिंग और ड्रोन जैसी तकनीकों से किया जाता है।
लाभ (प्रीमियम और कवर)
| फ़सल श्रेणी | किसान द्वारा देय अधिकतम प्रीमियम | उदाहरण (बीमित राशि ₹50,000 पर) |
|---|---|---|
| खरीफ फ़सलें (धान, मक्का, सोयाबीन, बाजरा, कपास आदि) | 2% | ₹1,000 |
| रबी फ़सलें (गेहूँ, सरसों, चना, मसूर आदि) | 1.5% | ₹750 |
| वार्षिक वाणिज्यिक व बागवानी फ़सलें (गन्ना, प्याज़, फल-सब्ज़ी आदि) | 5% | ₹2,500 |
कवर किन-किन स्थितियों में मिलता है:
- बुवाई न हो पाना: प्रतिकूल मौसम के कारण बुवाई/रोपाई न हो सके तो भी दावा का प्रावधान है।
- खड़ी फ़सल का नुक़सान: सूखा, बाढ़, जलभराव, कीट व रोग, ओलावृष्टि, भूस्खलन, चक्रवात, बेमौसम बारिश आदि गैर-रोकथाम योग्य प्राकृतिक जोखिम।
- स्थानीय आपदाएँ: ओलावृष्टि, भूस्खलन, जलभराव जैसे स्थानीय घटनाक्रमों पर व्यक्तिगत खेत स्तर पर आकलन होता है; खरीफ 2026 से जंगली पशुओं के हमले की हानि भी इसमें ऐड-ऑन कवर के रूप में शामिल है और धान जलभराव का कवर पुनः शुरू किया गया है।
- कटाई-पश्चात हानि: कटाई के बाद खेत में सूखने हेतु फैलाई गई फ़सल का निर्दिष्ट आपदाओं से नुक़सान भी कवर होता है।
पात्रता (कौन लाभ ले सकता है)
- अधिसूचित क्षेत्रों में अधिसूचित फ़सल उगाने वाले सभी किसान — भूमि के मालिक किसान, बटाईदार (sharecropper) और किरायेदार किसान भी शामिल हैं।
- ऋण लेने वाले (KCC/फ़सल ऋण) और बिना ऋण वाले — दोनों प्रकार के किसान नामांकन करा सकते हैं; योजना अब पूरी तरह स्वैच्छिक है।
- शर्त बस यह है कि नामांकन उसी फ़सल व क्षेत्र के लिए हो, जिसे राज्य सरकार ने उस सीज़न में अधिसूचित किया है, और अंतिम तिथि से पहले प्रीमियम जमा हो।
आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक / खाता विवरण (दावा राशि इसी खाते में आती है)
- भूमि अभिलेख — खसरा/खतौनी या राज्य का भूमि रिकॉर्ड (बटाईदार/किरायेदार हेतु बटाई समझौता/घोषणा)
- बुवाई प्रमाण / स्व-घोषणापत्र — कौन-सी फ़सल, कितने क्षेत्र में बोई गई
- पासपोर्ट आकार फ़ोटो
आवेदन प्रक्रिया
- ऑनलाइन: आधिकारिक portal pmfby.gov.in पर जाएँ, किसान पंजीकरण करके फ़सल, क्षेत्र व बैंक विवरण भरें और अपना प्रीमियम हिस्सा ऑनलाइन जमा करें — रसीद संभालकर रखें।
- बैंक से: फ़सल ऋण/KCC लेने वाले किसान अपनी बैंक शाखा से नामांकन करा सकते हैं — प्रीमियम ऋण खाते से काटा जाता है।
- CSC / ऐप से: नज़दीकी Common Service Centre या आधिकारिक Crop Insurance App से भी नामांकन संभव है।
अंतिम तिथि की समझ (deadline logic): हर सीज़न के लिए अंतिम तिथि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा तय होती है और फ़सल व राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है; राज्यों द्वारा समय-समय पर तिथि बढ़ाई भी जाती है। इसलिए अपने राज्य व फ़सल की सटीक अंतिम तिथि pmfby.gov.in या ज़िला कृषि कार्यालय से अवश्य जाँचें और तिथि बीतने से पहले नामांकन करा लें — देर होने पर उस सीज़न का बीमा नहीं मिलेगा।
दावा (Claim) प्रक्रिया
- 72 घंटे में सूचना: स्थानीय आपदा (ओलावृष्टि, जलभराव, जंगली पशु आक्रमण आदि) से नुक़सान होते ही 72 घंटों के भीतर बीमा कंपनी, अपनी बैंक शाखा, स्थानीय कृषि विभाग/ज़िला प्रशासन या Crop Insurance App के माध्यम से सूचना दें; ऐप से जियोटैग की हुई फ़ोटो अपलोड करें।
- आकलन: स्थानीय हानि का व्यक्तिगत सर्वेक्षण होता है; व्यापक नुक़सान (सूखा/बाढ़) का आकलन फसल कटाई प्रयोगों के उपज आँकड़ों व तकनीकी माध्यमों से किया जाता है।
- भुगतान: स्वीकृत दावा राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है (Digiclaim प्रणाली से PFMS के माध्यम से)। निर्धारित अवधि के बाद देरी होने पर बीमा कंपनी किसान को 12% वार्षिक दंड ब्याज देने के लिए बाध्य है।
- दावे की स्थिति pmfby.gov.in पर अपने आवेदन/पॉलिसी विवरण से देखी जा सकती है।
महत्वपूर्ण Links
- आधिकारिक portal: https://pmfby.gov.in — नामांकन, प्रीमियम कैलकुलेटर, अधिसूचित फ़सलें/तिथियाँ व दावा स्थिति
- आधिकारिक Crop Insurance App — नामांकन, नुक़सान की सूचना व दावा ट्रैकिंग के लिए
नोट: योजना की जानकारी आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है। आवेदन से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम जानकारी अवश्य जाँचें।

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