हार्ट अटैक अचानक नहीं आता: 99% मामलों में पहले से थे ये 4 छिपे जोखिम कारक - क्या आप भी खतरे में हैं?

अक्सर कहा जाता है कि हार्ट अटैक अचानक आ जाता है, लेकिन एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन की तस्वीर कुछ और कहती है। Journal of the American College of Cardiology में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हार्ट फेलियर के 99% से अधिक मामलों में मरीज़ के शरीर में पहले से चार में से कम-से-कम एक जोखिम कारक मौजूद था। समस्या यह है कि ये चारों कारक सालों तक बिना लक्षणों के चुपचाप नुकसान पहुँचाते रहते हैं।

कौन-से हैं ये 4 छिपे जोखिम कारक?

1. उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)

अध्ययन में यह सबसे आम कारक निकला — हार्ट अटैक या स्ट्रोक के शिकार 93% से अधिक लोगों में पहले रक्तचाप बढ़ा हुआ पाया गया। लगातार ऊँचा दबाव धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुँचाता है, उनमें प्लाक जमने लगता है और दिल को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। अध्ययन में रक्तचाप 120/80 mmHg या उससे अधिक को ही 'सामान्य से ऊपर' माना गया था।

2. उच्च कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol)

खराब लिपिड प्रोफाइल — ख़ासकर अधिक LDL और कम HDL — धमनियों को धीरे-धीरे संकरा और सख़्त करता जाता है। ऐसे में ख़ून का थक्का बनकर दिल की मांसपेशी तक रक्त प्रवाह रोक सकता है। अध्ययन में कुल कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL या अधिक को जोखिम की श्रेणी में रखा गया।

3. बढ़ी हुई ब्लड शुगर (High Blood Sugar / डायबिटीज़)

लंबे समय तक ऊँची शुगर रक्त वाहिकाओं को भीतर से क्षतिग्रस्त करती है और दिल की बीमारी का ख़तरा कई गुना बढ़ा देती है। अध्ययन में खाली पेट शुगर 100 mg/dL या अधिक — यानी प्री-डायबिटीज़ स्तर — को भी जोखिम कारक माना गया।

4. धूम्रपान और तंबाकू (Tobacco Use)

धूम्रपान इन चारों में सबसे सीधा और रोकथाम योग्य कारक है। अध्ययन में वर्तमान ही नहीं, पहले कभी धूम्रपान कर चुके लोगों को भी जोखिम श्रेणी में रखा गया, क्योंकि नुकसान लंबे समय तक बना रहता है।

अध्ययन की मुख्य बातें

  • यह अध्ययन अमेरिका की Northwestern University और दक्षिण कोरिया की Yonsei University के शोधकर्ताओं ने किया।
  • इसमें दक्षिण कोरिया के 93 लाख से अधिक और अमेरिका के करीब 7,000 वयस्कों के 20 साल तक के स्वास्थ्य रिकॉर्ड देखे गए।
  • 93% से अधिक मरीज़ों में एक नहीं, दो या अधिक जोखिम कारक एक साथ मौजूद थे।
  • 60 साल से कम उम्र की महिलाओं — जिन्हें आम तौर पर कम जोखिम वाला माना जाता है — में भी 95% से अधिक मामलों में इनमें से कोई कारक पहले से था।
  • अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. फिलिप ग्रीनलैंड के अनुसार, यह अध्ययन स्पष्ट दिखाता है कि इन घटनाओं से पहले किसी-न-किसी जोखिम कारक का मौजूद होना लगभग 100% है।

एक ज़रूरी स्पष्ट बात: यह अध्ययन भारत के मरीज़ों पर नहीं, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के data पर हुआ है। इसलिए '99%' वाला आँकड़ा भारत के लिए सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता — लेकिन ये चारों कारक भारतीयों में भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं, इसलिए चेतावनी भारत के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है।

इन चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें

  • बार-बार बिना वजह थकान महसूस होना
  • सीने में discomfort, दबाव या भारीपन
  • दर्द का बाँहों, गर्दन या पीठ तक फैलना
  • साँस फूलना, जी मिचलाना या अत्यधिक पसीना आना

यदि इनमें से कोई संकेत दिखे और ऊपर के चार कारकों में से कोई भी आप पर लागू हो, तो देर न करें — तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

बचाव के लिए क्या करें?

  • साल में कम-से-कम एक बार रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जाँच ज़रूर कराएँ — 'ठीक महसूस होना' ही काफी नहीं है।
  • धूम्रपान और तंबाकू पूरी तरह छोड़ें।
  • नमक, तला-भुना और प्रोसेस्ड खाना कम करें; रोज़ाना चलना या हल्का व्यायाम आदत बनाएँ।
  • रक्तचाप या शुगर की दवा चल रही हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना बंद न करें।

स्रोत: Journal of the American College of Cardiology में प्रकाशित अध्ययन (Northwestern University व Yonsei University, 2025); मूल समाचार — Times Now Digital। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है।

Post a Comment

0 Comments