भारतीय बेटियों का दम: जिम्बाब्वे को 92 रन से रौंदा, तीसरा मैच भी भारत के नाम


 

रायपुर की शाम एक बार फिर तिरंगे के नाम रही। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने तीसरे मैच में जिम्बाब्वे को 92 रनों के बड़े अंतर से हराकर अपना दबदबा साबित कर दिया।

रायपुर में बेटियों का जलवा

तीन मैचों की यह टी20 सीरीज रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में खेली गई, और स्मृति मंधाना के लिए यह पूर्णकालिक कप्तान के रूप में पहली जिम्मेदारी थी। कप्तानी की इस नई पारी में उन्होंने टीम को जीत की लय में बनाए रखा।

सीरीज के पहले मैच में जिम्बाब्वे ने भारत को शुरुआती झटके देकर मुश्किल में डाल दिया था। तब दीप्ति शर्मा और डेब्यू कर रहीं निकी प्रसाद की साझेदारी ने टीम को संकट से निकाला था। तीसरे मैच में भारत ने किसी भी तरह का मौका नहीं दिया और मैदान पर पूरी तरह हावी रहा।

🏏 मैच के सितारे

  • भारत का स्कोर: 216/7 (20 ओवर) — जिम्बाब्वे 124/7 (20 ओवर)
  • टॉप स्कोरर: हरमनप्रीत कौर — 91* रन (41 गेंद, 10 चौके, 5 छक्के); यह भारत में किसी भारतीय बल्लेबाज का महिला टी20I में सर्वोच्च स्कोर है। शेफाली वर्मा ने भी 69 रन (37 गेंद) बनाए।
  • सबसे सफल गेंदबाज: नंदनी शर्मा — 4 ओवर में 18 रन देकर 3 विकेट; दीप्ति शर्मा ने भी किफायती गेंदबाजी (1/18) की।
  • प्लेयर ऑफ द मैच: हरमनप्रीत कौर
  • सीरीज परिणाम: भारत की 3-0 से क्लीन स्वीप

92 रन की जीत के मायने

टी20 क्रिकेट में 92 रन की जीत सिर्फ जीत नहीं, एक संदेश है। यह बताती है कि भारतीय टीम की बल्लेबाजी में गहराई है, गेंदबाजी में धार है और फील्डिंग में अनुशासन है। जब तीनों विभाग एक साथ चलते हैं, तो सामने की टीम के पास जवाब नहीं बचता।

बेटियों के लिए खुले स्टेडियम के दरवाजे

इस सीरीज की एक खास बात रही महिला दर्शकों के लिए मुफ्त प्रवेश। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुझाव पर तीनों टी20 मैचों में महिला दर्शकों को निःशुल्क प्रवेश दिया गया। जब बेटियाँ मैदान में खेल रही हों और स्टैंड में भी बेटियों की आवाज़ गूँजे, तो यह भारतीय खेल संस्कृति में आ रहे बदलाव की सबसे सुंदर तस्वीर है।

आगे क्या?

टी20 सीरीज के बाद असली इम्तिहान वनडे का है। तीन मैचों की वनडे सीरीज वडोदरा में 23, 25 और 28 अक्टूबर को खेली जाएगी। जिस आत्मविश्वास के साथ टीम इंडिया ने यह मैच जीता है, उससे उम्मीद है कि वही जोश वनडे में भी दिखेगा।

अंत में

कभी महिला क्रिकेट को कम आँका जाता था, आज वही बेटियाँ स्टेडियम भर रही हैं और विरोधियों को बड़े अंतर से हरा रही हैं। यह जीत सिर्फ स्कोरबोर्ड की नहीं, उस सोच की जीत है जो कहती है कि खेल में बेटियाँ किसी से कम नहीं।

जय हिंद! 🇮🇳


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